समस्त प्रियजन
एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुरोध – भारत की जनगणना *मार्च 2027* तक पूरी होने जा रही है। जनगणना अधिकारी जल्द ही आपके पास आकर जानकारी एकत्र करेंगे।
जब आपसे आपकी *मातृभाषा* के बारे में पूछा जाएगा और फिर आपसे यह पूछा जाएगा कि आप कौन-कौन सी भाषाएं जानते हैं, तो *कृपया "संस्कृत" को उन भाषाओं में ज़रूर शामिल करें* जिन्हें आप जानते हैं।
भले ही हर कोई संस्कृत बोल न सके, लेकिन हम इसे निश्चित रूप से *रोज़ की प्रार्थना, जप, श्लोक, पूजा और रीति-रिवाज़ों* में उपयोग करते हैं।
*पिछली जनगणना* के अनुसार, पूरे देश में *संस्कृत भाषी लोगों की संख्या मात्र 2000* थी। जबकि *अरबी और फ़ारसी* भाषाएं बोलने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक थी और उन्हें *सरकारी अनुदान और समर्थन* भी प्राप्त हुआ।
यदि *संस्कृत को ‘विलुप्त भाषा’ घोषित कर दिया गया*, तो हमारे *प्राचीन धर्मग्रंथ, वेद, पुराण आदि* का *प्रकाशन बंद* हो जाएगा। हम *अपनी जड़ों से कट* जाएंगे और अंत में हमारी पूजा-पद्धतियाँ केवल *डीजे बजाने तक* सीमित रह जाएंगी।
*संस्कृत* भारत की सबसे *प्राचीन और सुंदर भाषा* है। यह *सभी भाषाओं की जननी* है। इस भाषा को *जीवित रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी* है।
अगर संस्कृत को 'विलुप्त' घोषित कर दिया गया, तो इसके *विकास और विस्तार* के लिए कोई *सरकारी फंडिंग या सहायता* नहीं मिलेगी। शायद हम इसे *हमेशा के लिए खो बैठें*।
केवल हमारा *सचेत प्रयास ही संस्कृत को जीवित* रख सकता है।
*अभी भी देर नहीं हुई है। कृपया यथासंभव संस्कृत सीखना शुरू करें।*
यदि आप इससे सहमत हैं, तो कृपया इस संदेश को *अपने सभी मित्रों के साथ साझा करें।*
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ
विक्रम विवि
मध्य प्रदेश. भारत